
चांद एक ऐसा चीज है जो हर खूबसूरत चीजों में फिट बैठता है. और हर खूबसूरत चीजों का तुलना चांद से किया जाता है। महबूबा का हुस्न हों या मां का चेहरा हमेशा चांद की तरह चमकता रहता हैं। इन्हीं चीजों को शायरों ने अपने कलम से बखूबी उतरने की कोशिश की । आईए जानते हैं चांद पर कहें गए शायरों के शेर..
• ईद का चाँद तुम ने देख लिया
चाँद की ईद हो गई होगी ।।
~इदरीश आज़ाद
• उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
~इफ्तिखार नशीम
• कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा।
~इब्न-ए – इंशा
• मुझ को मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब
देर से चाँद निकलना भी ग़लत लगता है।
~ अहमद कमाल
• शम्स का हमनशी आसमा का ताज
सितारों के बीच निखरता हुआ ये चांद
आशिकों का जान दिल का अरमान
बदलो के बीच छिपाता हुआ ये चांद
~KS Siddiqui
