Father’s day: पर पर कहें गए शायरों के शेर।

Father’s day: वैसे तो मेरा मानना है कि की मां बाप का एक दिन नहीं बल्कि मां बाप से ही दिन होता हैं। लेकिन फिर भी एक स्पेशल डेट मुकर्रर किया गया हैं। जिस तरह से अनेकों त्योहार का एक दिन मुकर्रर होता है उसी तरह से रिश्तों में भी एक मुकर्रर दिन होता हैं ।

जैसे आज पूरी दुनियां में फ़ादर्स डे मनाया जा रहा है लोग अपने बाप के साथ सोशल मीडिया पर फ़ोटो पोस्ट करते है और उसके साथ शेर भी लिखते हैं। तो क्या आपको पता है की वो शेर किस शायरों के होते हैं? अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं। शायरों की शायरी..

घर की बुनियादें दीवारें बाम-ओ-दर थे बाबू जी
सब को बाँध के रखने वाला ख़ास हुनर थे बाबू जी

कभी बड़ा सा हाथ-ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस आधा डर थे बाबू जी

~आलोक श्रीवास्तव

हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब
पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने

~ मेराज फैजाबादी

ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा

~मुनव्वर राणा

बुरे वक्त में जो टूटा है तो टूट कर बिखर जाता।
अगर सर पर बाप का हाथ ना होता तो मर जाता।

~KS Siddiqui

घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा
ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे

~साजिद जावेद

मुद्दत के बाद ख़्वाब में आया था मेरा बाप
और उस ने मुझ से इतना कहा ख़ुश रहा करो

~अब्बास ताबिश

मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

~मेराज फैजाबादी

हड्डियाँ बाप की गूदे से हुई हैं ख़ाली
कम से कम अब तो ये बेटे भी कमाने लग जाएँ

~रऊफ खैर

Published by The Seen News Network

Blogger, poet, writer and medicine experts

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