
इंदौर: इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े शायर डॉ. राहत इंदौरी के शेर जो आज इंकलाब का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। जब भी जुल्म होता है तो लोग इन्ही के शेर पढ़कर लोगो में क्रांति भरते हैं। इनके शेर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की संसद से लेकर गली नुक्कड़ तक पर पढ़े और सुने जाते है। राहत साहब आज भले ही हमारे बीच में नहीं है लेकिन इनके शेर पढ़ने के बाद लगता है की वो हर जगह है जुल्म से लेकर मोहब्बत तक में इनके शेर लोगों के दिलो पर गहरी असर छोड़ती हैं। मानो ऐसा लगता है की जैसे नई ताज़गी मिल गई हैं।
आइए जानते है राहत साहब के वो शेर जो आज क्रांति को नया नज़रिया दे रही हैं..
1 . लगेगी आग तो आयेंगे घर कई जड़ में यहां पर सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी हैं।
2. सभी का खून शामिल यहां की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी हैं!
3. हम अपने जान के दुश्मनों दुश्मन–ए जां कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते है।।
4. अड़े थे जिद पर की सूरज बना के छोड़ेंगे पसीने छूट गए एक दिया बनाने में मेरी निगाह में ओ शख्स आदमी भी नही जिसे जमाना लगा है खुदा बनाने में।
5. शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम आंधियों से कह दो औकात में रहें।
6. अब कहां ढूंढने जाओगे हमारे कातिल को आप तो कत्ल का इल्ज़ाम हमी पर रख दो
7. मैं जब में जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना।
8. हैं दुनियां छोड़ना मंजूर लेकिन वतन को छोड़कर जानें का नई।
9. अभी गनीमत है मेरा सब्र अभी लबालब भरा नहीं हू वो मुझको मुर्दा समझता हैं उससे कहो अभी मरा नहीं हूं
10. जनाजे पर लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा हैं।
