
शायर: सैय्यद जौन एलिया का जन्म यूपी के अमरोहा में हुआ था। इनके खानदान में सभी इल्मी लोग थे इनके पिता ख़ुद एक शायर थे। और पिता से ही इनमे शायरी का हुनर आया। जौन एलिया आज के दौर के सबसे बड़े शायर माने जाते इन्होंने ने दर्द और गम में डूबकर रूहानी शेरों को जना जो आज लोगों के जुबां पर रहता हैं।
जौन एलिया के ग़ज़ल और शेर
1. एक हुनर हैं जो कर गया हूं मैं सब के दिल से उतर गया हूं मैं
कैसे अपनी हंसी को जब्त करू सुन रहा हु की घर गया हूं मैं।
अजब इल्जाम हूं जमाने का की यहां सब के सर गया हूं मै।
2. एक नया रिश्ता पैदा क्यों करे हम जब बिछड़ना हैं तो झगड़ा क्यों करें हम।
ये काफ़ी है की हम दुश्मन नहीं हैं वफा दारी का दावा क्यों करें हम।
नहीं दुनियां को जब परवाह हमारी तो दुनियां को परवाह क्यों करें हम।
3. जो गुजारी ना जा सकी हमसे हमने वो जिंदगी गुजारी हैं।।
4. मैं भी बहुत अज़ीब हु इतना अजीब हूं की बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
5 . ये मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता एक ही सख्स था जहान में क्या।
6. बहुत नज़दीक आती जा रही हो बिछड़ने का इरादा कर लिया है क्या।
7 . सारी दुनियां के गम हमारे हैं और सितम ये हैं की हम तुम्हारे हैं
8 . और तो क्या था बेचने के लिए अपने आंखो के ख़्वाब बेचा है हमने।
