शकील आज़मी के जन्म दिन पर उनके 10 मशहूर शेर और ग़ज़ले.

शकील आज़मी

हिंदुस्तान के बड़े शायर और गीतकार शकील आज़मी उर्दू अदब के मशहूर शायर हैं इनके लिखे कलाम देश विदेश में पढ़े और सुने जाते हैं ज़मी हिंदुस्तान की हो या दुबई की जब ये अपने कलाम पढ़ते हैं तो तालियों की गड़गड़ाहट दूर तक गूंजती हैं। इनके शेर रूह को अजीब सा सुखन देती हैं और युवाओं को हौसला देती।

10 बड़े शेर शकील आज़मी साहब के

1.

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर
सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है

कनीज़ हो कोई या कोई शाहज़ादी हो
जो इश्क़ करता है कब ख़ानदान देखता है।

2.

चढ़ा हुआ है जो दरिया उतरने वाला है
अब इस कहानी का किरदार मरने वाला है

ये आगही है किसी हादसे के आमद की
बदन का सारा असासा बिखरने वाला है

ज़रा सी देर में ज़ंजीर टूट जाएगी
जुनून अपनी हदों से गुज़रने वाला है

‘शकील’ हम से किसी को शिकायतें हैं बहुत
चलो कोई तो हमें प्यार करने वाला है।

3.

मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल
तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल

तू नई सुबह के सूरज की है उजली सी किरन
मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल

मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’
टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल।

4.

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।

5.

अपनी मंज़िल पे पहुँचना भी खड़े रहना भी
कितना मुश्किल है बड़े हो के बड़े रहना भी।

6.

भूक में इश्क़ की तहज़ीब भी मर जाती है
चाँद आकाश पे थाली की तरह लगता है

7.

हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए
कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए।

8.

फिर यूँ हुआ थकन का नशा और बढ़ गया
आँखों में डूबता हुआ जादा लगा हमें।

9.

अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है
ये हम ने इश्क़ किया है या कोई भूल की है

10.

तुम्हारी मौत ने मारा है जीते-जी हम को
हमारी जान भी गोया तुम्हारी जान में थी

Published by The Seen News Network

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