
उर्दू अदब और मशहूर गीतकार शकील बदायूंनी जिनके शायरी पढ़ने के बाद रूह को नया ताज़गी मिलता हैं और जिंदगी जीने का अलग ही सलीका सीखता हैं। आइए जानते हैं इनके इनके मशहूर शेर और ग़ज़ले।
1.
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का ‘शकील’
मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया
2.
जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है
हँसी ज़ब्त करने को जी चाहता है
जहाँ इश्क़ में डूब कर रह गए हैं
वहीं फिर उभरने को जी चाहता है
वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं
मगर बात करने को जी चाहता है
गुनाह-ए-मुकर्रर ‘शकील’ अल्लाह अल्लाह
बिगड़ कर सँवरने को जी चाहता है
3.
वो यूँ खो के मुझे पाया करेंगे
मिरा अफ़्साना दोहराया करेंगे
सितम अपने जो याद आया करेंगे
तो दिल ही दिल में पछताया करेंगे
‘शकील’ अपने लिए लम्हात-ए-फ़ुर्सत
पयाम-ए-नौ-ब-नौ लाया करेंगे
4.
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
5.
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे
ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिजा नहीं है
6.
मोहब्बत ही में मिलते हैं शिकायत के मज़े पैहम
मोहब्बत जितनी बढ़ती है शिकायत होती जाती है
7.
तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो
आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना।
8.
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ।
9.
वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं
मगर बात करने को जी चाहता है।
10.
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी
तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे।
11.
बुज़-दिली होगी चराग़ों को दिखाना आँखें
अब्र छट जाए तो सूरज से मिलाना आँखें।
12.
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई।
13.
क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें
खुल गई आँख तो ताबीर पे रोना आया।
14.
लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएँ घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
15.
रहमतों से निबाह में गुज़री
उम्र सारी गुनाह में गुज़री।
