डॉ. अल्लामा इक़बाल के बेहतरीन 21 शेर.

डॉ. मोहम्मद अल्लामा इक़बाल

पाकिस्तान के राष्ट्र कवि और सदी के सबसे बड़े शायर और विद्वान् डॉ. अल्लामा इक़बाल जिन्होंने विश्व को एक से बढ़कर एक मैसेज अपने शेर के माध्यम से दिया.. आइए जानते है इनके मशहूर 21 शेर.

1.

कि जो मोहम्मद से वफा तूने तो हम तेरे है
ये जहां क्या चीज़ लौह- ओ- कलम तेरे है।।

2.

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा

हम बुलबुले है इसके ये गुलसिता हमारा

3.

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
ज़िंदगी शम्अ की सूरत हो ख़ुदाया मेरी।

4.

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।

5.

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं।

6.

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख।

7.

जमीर जाग ही जाता है अगर जिंदा हो इकबाल

कभी गुनाह से पहले तो कभी गुनाह के बाद।

8.

जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी
उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो।

9.

कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी.
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहां हमारा.
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहाँ से.
फिर भी मगर है कायम नामोनिशां हमारा।

10.

ख़ुदी का सिर्र-ए-निहाँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह
ख़ुदी है तेग़ फ़साँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह
ये दौर अपने बराहीम की तलाश में है
सनम-कदा है जहाँ ला-इलाहा-इल्लल्लाह।

11

चीन-ओ-अरब हमारा हिन्दोस्तां हमारा…
मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहाँ हमार।

12.

दिल में खुदा का होना लाजिम है इकबाल

सजदों में पड़े रहने से जन्नत नहीं मिलती।

13.

बातिल से दबने वाले ऐ आसमाँ नहीं हम
सौ बार कर चुका है तू इम्तिहाँ हमारा

14.

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा।

15.

इल्म में भी सुरूर है लेकिन
ये वो जन्नत है जिस में हूर नहीं।

16.

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में।

17.

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है।

18.

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी
ख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़।

19.

हरम-ए-पाक भी अल्लाह भी क़ुरआन भी एक
कुछ बड़ी बात थी होते जो मुसलमान भी एक।

20.

मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमाँ की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन न सका।

21.

बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है।

Published by The Seen News Network

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