अनीश मुईन: महज़ 27 साल की उम्र में दुनियां की हक़ीक़त समझने वाला शायर ने क्यों की खुदकुशी? अपने सुसाइड नोट में क्या लिखा?

अनीश मुईन

पाकिस्तान के मशहूर शायर अनीश मुईन जिन्होंने कम उम्र में ही शायरी की दुनियां में अपना नाम कमा लिया था। जब ये माइक पर ग़ज़ल पढ़ने आते थे तो लोगो की तालियां रुकने का नाम ही नही लेती थी। ये भी उनका शुक्रिया अदा करते नही थकते थे। इनकी गजलें हालिया जिंदगी की तर्जुमानी करती थी।

जन्म — 1960 मुल्तान, पकिस्तान

मृत्यु— 5फ़रवरी 1986 मुल्तान पकिस्तान

इतना शोहरत मिलने के बाद भी अनीश मुईन बेचैन रहते थे और लोगो से कहते थे की ये दुनियां कुछ भी नही है । एक दिन मरना ही हैं। इनकी शायरी में भी जिंदगी और मौत की जुगलबंदी बखूबी देखने को मिलता हैं।

इक डूबती धड़कन की सदा लोग न सुन लें
कुछ देर को बजने दो ये शहनाई ज़रा और।

~ अनीश मुईन

खुदकुशी करने से पहले सुसाइड नोट भी लिखा जिसका तर्जुमा ये है।

अनीश मुईन का सुसाइड नोट

ख़ुदा आपको हमेशा सलामत रखे।

मेरी इस हरकत की, सिवाए इसके, कोई और वजह नहीं कि मैं ज़िंदगी की यक्सानियत से उकता गया हूं। ज़िंदगी की किताब का जो पन्ना उलटता हूं उस पर वो ही लिखावट नज़र आती है जो पिछले पन्ने में पढ़ चुका होता हूं, इसलिए मैंने ढेर सारे पन्ने छोड़कर वो लिखावट पढ़ने का फैसला किया है जो आखिरी पन्ने पर लिखी हुई है। मुझे न तो घर वालों से शिकायत है न दफ्तर या बाहर वालों से, बल्कि लोगों ने तो मुझे इतनी मुहब्बत की है कि मैं उसके काबिल भी नहीं था। लोगों ने अगर मेरे साथ कोई ज़्यादती की भी है तो या किसी ने मेरा कुछ देना है तो मैं वो माफ करता हूं। खुदा मेरी भी ज़्यादतियों और गुनाहों को माफ फरमाए।

और आखिर में एक खास बात और, वो ये कि आखिर में राहे खुदा में देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं है इसलिए मैं अपनी आंखे आई-बैंक को डोनेट करता हूं। मेरे बाद ये आंखे किसी मुस्तहक़ शख्स को लगा दी जाएं तो मेरी रूह को असल मायनों में सुकून हासिल हो सकने की उम्मीद है। मरने के बाद मुझे आपकी दुआओं की पहले से ज़्यादा ज़रूरत रहेगी, अलबत्ता ग़ैर-ज़रूरी रस्मों पर पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है। मैंने कुछ रुपये आमना के पास इसलिए रखवा दिये हैं ताकि इस मौके पर काम आ सकें।

आपका नालायक बेटाअनीस मुईनअस्लम ख़ान बिल्डिंग, मुल्तान

4/2/86

इनके लिखे शेर।

• हमारी मुस्कुराहट पर न जाना।
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है।

• अंजाम को पहुँचूँगा मैं अंजाम से पहले।
ख़ुद मेरी कहानी भी सुनाएगा कोई और।।

• वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था
पानी पानी कहते कहते डूब गया है।।

• मुमकिन है कि सदियों भी नज़र आए न सूरज
इस बार अंधेरा मिरे अंदर से उठा है।।

• अजब अंदाज़ से ये घर गिरा है
मिरा मलबा मिरे ऊपर गिरा है।

• याद है ‘आनिस’ पहले तुम ख़ुद बिखरे थे
आईने ने तुम से बिखरना सीखा था।।

• मेरे अपने अंदर एक भँवर था जिस में
मेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है

Published by The Seen News Network

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