“हम अम्न चाहते है मगर जुल्म के खिलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो जंग ही सही” साहिर लुधियानवी की वो फेमस शेर जो आज दुनियां भर में प्रसिद्ध हैं।

साहिर लुधियानवी

साहिर लुधियानवी: हर दौर में इंकलाब का पहला नीव शायरों के शायरी ने रखा हैं अगर उनमें से सबसे ज्यादा इंकलाब की शायरी लिखने वालों में साहिर लुधियानवी का नाम पहले आता है। साहिर साहब ने मोहब्बत करने वालों के लिए अपनी गजलें और शेर के ज़रिए उन्हें नया रास्ता दिखाया हैं । साहिर साहब ने जितने भी गाने फ़िल्मों के लिए लिखे है वो आज अमर हो गया हैं। अगर देखा जाय तो साहिर का स्थान आज के दौर में कोई भी शायर नहीं ले सकता। साहिर साहब ने मोहब्बत से लेकर जंग तक और जमी से लेकर आसमा तक की शायरी की हैं। आइए जानते हैं इनकी शायरी।

1. मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी कभी होती हैं दिलबरों की इनायत कभी कभी

2. मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया

बर्बादियो को शोग मानना फिजूल था बर्बादियो का जश्न मनाता चला गया।

3. कभी ख़ुद पे कभी हालात पर रोना आया बात जब निकली तो हर बात पर रोना आया

हम तो समझे थे की भूल गए है उनको क्या हुआ आज किस बात पर रोना आया

4. खून अपना हो या पराया हो नस्ल– ए –आमद का खून है आखिर

जंग मशरिक में हो या मगरिब में अमन ए आलम का खून है आख़िर

5. तू हिंदू न बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है इंसान बनेगा।

6. तेरा मिलना खुशी की बात सही तुझसे मिलकर उदास रहता हूं।

7. हज़ार बर्क गिरे लाख आंधियां उठे वो फूल खिल कर रहेंगे जो खिलने वाले हैं

8. आप दौलत की तराजू में दिलों को तौले हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं।

9. जंग तो ख़ुद एक मसला हैं जंग क्या मसलों को हल देगी।

10. ए महलों ए तख्तों ए ताज़ों की दुनियां इंसा के दुश्मन समाजों की दुनियां ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनियां ये दुनियां अगर मिल भी जाए तो क्या हैं।

Published by The Seen News Network

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