मीर असर: “क्या कहूं किस तरह से जीता हूं गम को खाता हूं आंसू को पीता हूं ” मीर असर के रूहानी शेर।

शायर मीर असर

मीर असर: इनका असली नाम ख़्वाजा मोहम्मद मीर असर देलहवी था। इनका जन्म 1795 में दिल्ली में हुआ था। ये सूफ़ी शायर ख्वाजा मीर दर्द के छोटे भाई हैं। शायरी का शुरुआती दौर इन्होंने ने अपने भाई से ही सीखा हैं। इनके गज़ल और शेर में रूहानियत और मज़हबी का बेहतरीन मेल देखने को मिलता हैं।

आइए जानते है इनके मशहूर गजलें और शेर।

. न लगा ले गए जहां दिल को आह ले जाइए कहां दिल को

मुझ से ले तो चले हो देखो पर तोड़िए मत मिया कहीं दिल को

दुश्मनी तू ही इससे करता है दोस्त रखता हैं एक जहां दिल को

. दिल में सौ अरमान रखता हु प्यारे आखिर मैं जान रखता हूं

आह तेरे भी ध्यान में कुछ हैं इस कदर तेरा ध्यान रखता हूं

. क्या कहूं किस तरह से जीता हूं गम को खाता हूं आंसू को पीता हूं

. बेवफ़ा कुछ नही तेरी तकसीर मुझको मेरी वफ़ा ही रास नहीं

. यूं खुदा की खुदाई बर – हक़ हैं पर असर की हमे आस नहीं।

. तू कहां मै कहां प रहते हैं की आपस में दोनों रहते हैं

Published by The Seen News Network

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