फैज़ अहमद फ़ैज़ को समझा जा सकता है उनके इन शेरों से.

फैज़ अहमद फ़ैज़: पाकिस्तान के सबसे इंकलाबी और बागी शायरों में गिने जानें वाले शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जिन्होंने ने पाकिस्तान के हुक्मरानों को अपने शेरों के दम पर उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। ये आवाम के दिलों में बसने वाले सच्चे शायर थे। जुल्म को खुली चुनौती देते थे और उसका खुल केContinue reading “फैज़ अहमद फ़ैज़ को समझा जा सकता है उनके इन शेरों से.”

मीर असर: “क्या कहूं किस तरह से जीता हूं गम को खाता हूं आंसू को पीता हूं ” मीर असर के रूहानी शेर।

मीर असर: इनका असली नाम ख़्वाजा मोहम्मद मीर असर देलहवी था। इनका जन्म 1795 में दिल्ली में हुआ था। ये सूफ़ी शायर ख्वाजा मीर दर्द के छोटे भाई हैं। शायरी का शुरुआती दौर इन्होंने ने अपने भाई से ही सीखा हैं। इनके गज़ल और शेर में रूहानियत और मज़हबी का बेहतरीन मेल देखने को मिलताContinue reading “मीर असर: “क्या कहूं किस तरह से जीता हूं गम को खाता हूं आंसू को पीता हूं ” मीर असर के रूहानी शेर।”

“हम अम्न चाहते है मगर जुल्म के खिलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो जंग ही सही” साहिर लुधियानवी की वो फेमस शेर जो आज दुनियां भर में प्रसिद्ध हैं।

साहिर लुधियानवी: हर दौर में इंकलाब का पहला नीव शायरों के शायरी ने रखा हैं अगर उनमें से सबसे ज्यादा इंकलाब की शायरी लिखने वालों में साहिर लुधियानवी का नाम पहले आता है। साहिर साहब ने मोहब्बत करने वालों के लिए अपनी गजलें और शेर के ज़रिए उन्हें नया रास्ता दिखाया हैं । साहिर साहबContinue reading ““हम अम्न चाहते है मगर जुल्म के खिलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो जंग ही सही” साहिर लुधियानवी की वो फेमस शेर जो आज दुनियां भर में प्रसिद्ध हैं।”

“अब तो कहते हैं कि घबराके मर जायेंगे मर के भी चैन नहीं पाया तो किधर जायेंगे ” इब्राहिम जौक के मकबूल शेर!

मोहम्मद इब्राहिम जौक : एक दौर था जब उर्दू शायरी के सबसे बड़े शायर कहे जाते थे जौक यहां तक कि मिर्ज़ा ग़ालिब और मोमिन खां मोमिन से बड़े शायर माने जाते थे । ज़ौक जिस भी दरबार में जाते थे शेर पढ़ने के लिए वहां के लोग इनके दीवाने हो जाते थे और इनकाContinue reading ““अब तो कहते हैं कि घबराके मर जायेंगे मर के भी चैन नहीं पाया तो किधर जायेंगे ” इब्राहिम जौक के मकबूल शेर!”

ईद पर कहे गए टॉप 10 शेर।

1. ईद का चाँद तुम ने देख लियाचाँद की ईद हो गई होगी।। ~इदरीस आज़ाद 2. तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगीईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी ~जफर इकबाल 3. ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद काईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का। ~अज्ञात 4.Continue reading “ईद पर कहे गए टॉप 10 शेर।”

“जो गुजारी ना जा सकी हमसे हमने वो जिंदगी गुजारी हैं ” जौन एलिया आज के सबसे पसंदीदा शायर क्यों हैं?

शायर: सैय्यद जौन एलिया का जन्म यूपी के अमरोहा में हुआ था। इनके खानदान में सभी इल्मी लोग थे इनके पिता ख़ुद एक शायर थे। और पिता से ही इनमे शायरी का हुनर आया। जौन एलिया आज के दौर के सबसे बड़े शायर माने जाते इन्होंने ने दर्द और गम में डूबकर रूहानी शेरों कोContinue reading ““जो गुजारी ना जा सकी हमसे हमने वो जिंदगी गुजारी हैं ” जौन एलिया आज के सबसे पसंदीदा शायर क्यों हैं?”

लगेगी आग तो आयेंगे घर कई जद में यहां पर सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है! डॉक्टर राहत इंदौरी के वह शेर जो आज इंकलाब को नया पैग़ाम देता हैं!

इंदौर: इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े शायर डॉ. राहत इंदौरी के शेर जो आज इंकलाब का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। जब भी जुल्म होता है तो लोग इन्ही के शेर पढ़कर लोगो में क्रांति भरते हैं। इनके शेर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की संसद से लेकर गली नुक्कड़Continue reading “लगेगी आग तो आयेंगे घर कई जद में यहां पर सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है! डॉक्टर राहत इंदौरी के वह शेर जो आज इंकलाब को नया पैग़ाम देता हैं!”

Father’s day: पर पर कहें गए शायरों के शेर।

Father’s day: वैसे तो मेरा मानना है कि की मां बाप का एक दिन नहीं बल्कि मां बाप से ही दिन होता हैं। लेकिन फिर भी एक स्पेशल डेट मुकर्रर किया गया हैं। जिस तरह से अनेकों त्योहार का एक दिन मुकर्रर होता है उसी तरह से रिश्तों में भी एक मुकर्रर दिन होता हैंContinue reading “Father’s day: पर पर कहें गए शायरों के शेर।”

संत कबीर दास की जयंती पर पढ़िए उनके 8 दोहे जो आपको बताएंगे जिदंगी के असली मकसद।

संत कबीर दास संत कबीर दास जयंती : कबीर दास जी एक बहुत बड़े विद्वान , लेखक, कवि और विचारक के रूप में जाने जाते है। इन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में फैले बुराइयों को मिटाने के लिए लगा दिया। इन्होंने अपनी सारी धार्मिक शिक्षा रामानंद नामक गुरु से ली। और एक दिन वो गुरुContinue reading “संत कबीर दास की जयंती पर पढ़िए उनके 8 दोहे जो आपको बताएंगे जिदंगी के असली मकसद।”

उबैदुल्लाह अलीम के चुनिंदा कलाम।

उबैदुल्ला अलीम का जन्म 12 जून 1939 को भोपाल में हुआ था। और विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे। उबैदुल्लाह अलीम के मशहूर ग़ज़ल और शेर। • अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाएअब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भीकिContinue reading “उबैदुल्लाह अलीम के चुनिंदा कलाम।”

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