उसके बाद मजरूह साहब को म्यूजिक सीखने का शौक चढ़ा तो उन्होंने एक म्यूजिक कॉलेज में एडमिशन ले लिए किंतु इनके पिता जी को ये अच्छा ना लगा । जिसके कारण उन्हें ये शौक भी छोड़ना पड़ा। उसके बाद मजरूह सुल्तानपुरी ने 1935 में शायरी शुरू कर दी इनका तरन्नुम बेहतरीन होने के कारण इनकोContinue reading “Majrooh Sultanpuri : मजरूह सुल्तानपुरी अपने इंकलाबी शायरी की वजह से कई साल जेल में बिताई।”
