
अज़ीज़ हामिद मदनी नई उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित शायर माने जाते हैं । इनकी शायरी नई विषयो के लिए मानी जाती हैं । इनका जन्म भारत में हुआ था लेकिन बटवारे के समय ये पकिस्तान के कराची में जा कर बस गए.
जन्म – 15 जून 1922 रायपुर भारत
मृत्यु – 23 अप्रैल 1991 कराची पकिस्तान
आइए जानते हैं उनके लिखें कुछ मशहूर शेर.
• ताज़ा हवा बहार की दिल का मलाल ले गई
पा-ए-जुनूँ से हल्क़ा-ए-गर्दिश-ए-हाल ले गई
जुरअत-ए-शौक़ के सिवा ख़ल्वतियान-ए-ख़ास को
इक तिरे ग़म की आगही ता-ब-सवाल ले गई।
• माना कि ज़िंदगी में है ज़िद का भी एक मक़ाम
तुम आदमी हो बात तो सुन लो ख़ुदा नहीं।।
• वफ़ा की रात कोई इत्तिफ़ाक़ थी लेकिन
पुकारते हैं मुसाफ़िर को साएबाँ क्या क्या।
• जो बात दिल में थी उस से नहीं कही हम ने
वफ़ा के नाम से वो भी फ़रेब खा जाता।
• बैठो जी का बोझ उतारें दोनों वक़्त यहीं मिलते हैं
दूर दूर से आने वाले रस्ते कहीं कहीं मिलते हैं।
