जव्वाद शैख के 6 मशहूर गजलें और शेर।

ज़व्वाद शैख

अपने ताज़ा लबों– लहज़ा के मशहूर पाकिस्तानी शायर जव्वाद शैख जिनके शायरी हिंदुस्तान और पाकिस्तान में काफ़ी फेमस हैं । इनका जन्म 26 मई 1985 को सरगोंधा पाकिस्तान में हुआ था। ये अपने शायरी से लोगो के दिलों में अच्छा खासा अपना मकान बना लिया हैं। तो आइए जानते है इनके कुछ शेर।

• कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है
फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है

तुझ से जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती
तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है
एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है

यार हवा से कैसे आग भड़क उठती है
लफ़्ज़ कोई अँगारा कैसे हो सकता है।

• टूटने पर कोई आए तो फिर ऐसा टूटे
कि जिसे देख के हर देखने वाला टूटे

तू उसे किस के भरोसे पे नहीं कात रही??
चर्ख़ को देखने वाली!! तिरा चर्ख़ा टूटे

अपने बिखरे हुए टुकड़ों को समेटे कब तक??
एक इंसान की ख़ातिर कोई कितना टूटे

कोई टुकड़ा तिरी आँखों में न चुभ जाए कहीं
दूर हो जा कि मिरे ख़्वाब का शीशा टूटे।

• अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ
जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं।।

• क्या है जो हो गया हूँ मैं थोड़ा बहुत ख़राब
थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए।।

• अब मिरा ध्यान कहीं और चला जाता है
अब कोई फ़िल्म मुकम्मल नहीं देखी जाती।।

• कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है??
एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है।।

Published by The Seen News Network

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