मीराजी के 7 गजलें और शेर ।

• नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया
क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया

क्या भूला कैसे भूला क्यूँ पूछते हो बस यूँ समझो
कारन दोश नहीं है कोई भूला भाला भूल गया

कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें घातें थीं
मन बालक है पहले प्यार का सुंदर सपना भूल गया

• ज़िंदगी एक अज़िय्यत है मुझे
तुझ से मिलने की ज़रूरत है मुझे

दिल में हर लहज़ा है सिर्फ़ एक ख़याल
तुझ से किस दर्जा मोहब्बत है मुझे

तिरी सूरत तिरी ज़ुल्फ़ें मल्बूस
बस इन्ही चीज़ों से रग़बत है मुझे

• दीदा-ए-अश्क-बार है अपना
और दिल बे-क़रार है अपना

रश्क-ए-सहरा है घर की वीरानी
यही रंग-ए-बहार है अपना

चश्म-ए-गिर्यां से चाक-ए-दामाँ से
हाल सब आश्कार है अपना

• जैसे होती आई है वैसे बसर हो जाएगी
ज़िंदगी अब मुख़्तसर से मुख़्तसर हो जाएगी

• दो पल की थी अंधी जवानी नादानी की भर पाया
उम्र भला क्यूँ बीते सारी रो रो कर पछताने में

• एक ठिकाना आगे आगे पीछे एक मुसाफ़िर है
चलते चलते साँस जो टूटे मंज़िल का एलान करें

• ग़म के भरोसे क्या कुछ छोड़ा क्या अब तुम से बयान करें
ग़म भी रास न आया दिल को और ही कुछ सामान करें

Published by The Seen News Network

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