जैसा कि आप सब जानते ही होंगे 1 मई को पूरी दुनिया में मज़दूर दिवस मनाया जाता हैं। और ये देश बनाने में सबसे बड़ा योगदान मजदूरों का हैं। इसी लिए हर दौर के शायरों ने मजदूरों के दर्द को बखूबी आपने शायरी में उतरने की कोशिश की हैं। आइए जानते हैं मज़दूर के उपर लिखें शायरों के चुनिंदा शेर..!

सो जाते हैं फूटपाथ पर अख़बार बिछाकर मज़दूर कभी नींद की गोली नही खाते ।
~ मुनव्वर राणा
तू क़ादिर ओ आदिल है मगर तेरे जहाँ में
हैं तल्ख़ बहुत बंदा-ए-मज़दूर के औक़ात।
~ डॉ अल्लामा इक़बाल
सरों पे ओढ़ के मज़दूर धूप की चादर
ख़ुद अपने सर पे उसे साएबाँ समझने लगे।
~ शारिब मौरान्वी
ख़ून मज़दूर का मिलता जो न तामीरों में
न हवेली न महल और न कोई घर होता।
~हैदर अली जाफरी
आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए
आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए।।
~हफीज जालंधरी
फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं
वो बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं।।
~मुनव्वर राणा
